सूचना
का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून है
जो 12 अक्तूबर,
2005 को लागू
हुआ (15 जून,
2005 को इसके
कानून बनने के 120 वें दिन)। भारत में भ्रटाचार को रोकने
और समाप्त करने के लिये इसे बहुत ही प्रभावी कदम बताया जाता है। इस नियम के द्वारा
भारत के सभी नागरिकों को सरकारी रेकार्डों और प्रपत्रों में दर्ज सूचना को देखने
और उसे प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। जम्मू एवं काश्मीर मे सूचना का
अधिकार अधिनियम २०१२ के अन्तर्गत लागू है।
धारा 7(5) –
लोक सूचना अधिकारी यदि आवेदन लेने से इंकार करता है। अथवा परेशान करता है। तो उसकी शिकायत सीधे सूचना आयोग से की जा सकती है।
सूचना का अधिकार क्या है?
मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया जिसे सुचना का अधिकार यानी RTI कहा गया. इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी
जानकारी ले सकता है बस शर्त यह है की RTI के तहत पूछी जाने
वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए. यानि हम किसी सरकारी विभाग से उसके
विचार नही पूछ सकते. जैसे आप के ईलाके में विकास के कामो के लिए कितने पैसे खर्च
हुए है और कहाँ खर्च हुए है, आपके इलाके की राशन की दुकान
में कब और कितना राशन आया, स्कूल, कॉलेज
और हॉस्पिटल में कितने पैसे खर्च हुए है जैसे सवाल आप Right to information
act के तहत पता कर सकते है
सूचना का अधिकार 2005 प्रत्येक नागरिक को शक्ति प्रदान करता है कि वो:
• सरकार से कुछ भी पूछे या कोई भी सूचना
मांगे.
• किसी भी सरकारी निर्णय की प्रति ले.
• किसी भी सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण करे.
• किसी भी सरकारी कार्य का निरीक्षण करे.
• किसी भी सरकारी कार्य के पदार्थों के नमूने ले.
• किसी भी सरकारी निर्णय की प्रति ले.
• किसी भी सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण करे.
• किसी भी सरकारी कार्य का निरीक्षण करे.
• किसी भी सरकारी कार्य के पदार्थों के नमूने ले.
आरटीआई एक्ट के अन्तर्गत कौन-कौन से विभागों
से सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं –
- देश के राष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- राज्यपाल
- मुख्यमंत्री दफ्तर से
- संसद और विधानमंडल
- चुनाव आयोग
- सभी अदालतें
- तमाम सरकारी दफ्तर
- सभी सरकारी बैंक
- सारे सरकारी अस्पताल
- पुलिस विभाग
- देश की तीनों सेनाएं
- पीएसयू
- सरकारी बीमा कंपनियां
- सरकारी फोन कंपनियां
- सरकार से फंडिंग पाने वाले एनजीओ आदि से सूचनाएं मांगी जा सकती हैं।
.धारा
धारा-2(क) और (ज)
सभी सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर यूनिट, किसी भी प्रकार की सरकारी
सहायता से चल रहीं गैर सरकारी संस्थाएं व शिक्षण संस्थाएं, आदि
विभाग इसमें शामिल हैं. पूर्णत: निजी संस्थाएं इस कानून के दायरे में नहीं हैं
लेकिन यदि किसी कानून के तहत कोई सरकारी विभाग किसी निजी संस्था से कोई जानकारी
मांग सकता है तो उस विभाग के माध्यम से वह सूचना मांगी जा सकती है।
धारा-5(१)
हर सरकारी विभाग में एक या एक से अधिक
लोक सूचना अधिकारी बनाए गए हैं। यह वह अधिकारी हैं जो सूचना के अधिकार के तहत
आवेदन स्वीकार करते हैं, मांगी गई सूचनाएं एकत्र करते हैं और
उसे आवेदनकर्ता को उपलब्ध् कराते हैं।
धारा 6 (1) –
RTI का आवेदन लिखने का धारा है।
धारा 6(2) -
लोक सूचना अधिकारी को अधिकार नहीं है
कि वह आपसे सूचना मांगने का करण पूछे
धारा 6 (3) –
धारा 6 (3) –
अगर
आपका आवेदन गलत विभाग में चला गया है। तो वह विभाग 6 (3)
धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5 दिन के अंदर
भेज देगा।
धारा-7(1)
लोक सूचना अधिकारी की ज़िम्मेदारी है कि
वह 30 दिन के अन्दर (कुछ मामलों में 45
दिन तक) सूचना उपलब्ध् कराए।
अगर लोक सूचना अधिकारी आवेदन लेने से
मना करता है, तय समय सीमा में सूचना नहीं उपलब्ध्
कराता है अथवा गलत या भ्रामक जानकारी देता है तो देरी के लिए 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 25000 तक का ज़ुर्माना
उसके वेतन में से काटा जा सकता है। साथ ही उसे सूचना भी देनी होगी।
धारा 7(5) –
इस
धारा के अनुसार BPL कार्ड वालों को कोई
आरटीआई शुल्क नही देना होता।
धारा 7 (6) –
धारा 7 (6) –
इस
धारा के अनुसार अगर आरटीआई का जवाब 30 दिन में नहीं आता है तो सूचना निशुल्क में दी जाएगी।
धारा 18 –
धारा 18 –
अगर
कोई अधिकारी जवाब नही देता तो उसकी शिकायत सूचना अधिकारी को दी जाए।
धारा 8 –
धारा 8 –
इस के
अनुसार वो सूचना RTI में नहीं दी जाएगी
जो देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग की आंतरिक जांच को प्रभावित
करती हो।
धारा 19 (1) –
धारा 19 (1) –
अगर
आप की RTI का जवाब 30 दिन में नहीं आता है। तो इस धारा के अनुसार आप प्रथम अपील अधिकारी को
प्रथम अपील कर सकते हो।
धारा 19 (3) –
धारा 19 (3) –
अगर
आपकी प्रथम अपील का भी जवाब नही आता है तो आप इस धारा की मदद से 90 दिन के अंदर दूसरी अपील अधिकारी (राज्य
सूचना आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग मे) को अपील कर सकते है।
लोक सूचना अधिकारी यदि आवेदन लेने से इंकार करता है। अथवा परेशान करता है। तो उसकी शिकायत सीधे सूचना आयोग से की जा सकती है।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाओं को अस्वीकार करने, अपूर्ण, भ्रम में डालने वाली या गलत सूचना देने अथवा
सूचना के लिए अधिक फीस मांगने के खिलाफ केन्द्रीय या राज्य सूचना आयोग के पास
शिकायत कर सकते है।
शुल्क
किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी प्राप्त करने के लिए
आवेदन पत्र के साथ 10/- रूपये
की फीस है । ये फीस गरीबी रेखा से नीचे
के लोगो के लिए माफ़ है.
सूचना देने का
खर्च – 2 रू प्रति पृष्ठ
दस्तावेजों की जांच करने का शुल्क – जांच के पहले घंटे का कोई शुल्क नहीं पर उसके बाद हर घंटे का पांच रूपये शुल्क देना होगा। यह शुल्क केन्द्र व कई राज्यों के लिए ऊपर लिखे अनुसार है लेकिन कुछ राज्यों में यह इससे अलग है।
दस्तावेजों की जांच करने का शुल्क – जांच के पहले घंटे का कोई शुल्क नहीं पर उसके बाद हर घंटे का पांच रूपये शुल्क देना होगा। यह शुल्क केन्द्र व कई राज्यों के लिए ऊपर लिखे अनुसार है लेकिन कुछ राज्यों में यह इससे अलग है।
आवेदन
शुल्क के लिए हर राज्य की अपनी अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। आम तौर पर आप अपना शुल्क
निम्नलिखित तरीकों से जमा करा सकते हैं-
स्वयं नकद जमा करा के (इसकी रसीद लेना न भूले)
स्वयं नकद जमा करा के (इसकी रसीद लेना न भूले)
·
डिमाण्ड
ड्राफट
·
भारतीय
पोस्टल ऑर्डर
·
मनी
ऑर्डर से (कुछ राज्यों में लागू)
·
बैंकर्स
चैक से
· केन्द्र
सरकार से मामलों
में इसे एकाउंट आफिसर्स (Account Officer) के
नाम देय होने चाहिए
·
कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए निश्चित खाते खोले हैं। आपको उस खाते में
शुल्क जमा करना होता है। इसके लिए स्टेट बैंक की किसी
भी शाखा में नकद जमा करके उसकी रसीद आवेदन के साथ नत्थी करनी होती है। या आप उस
खाते के पक्ष में देय पोस्टल ऑर्डर या डीडी भी आवेदन के साथ संलग्न कर सकते हैं।
· कुछ राज्यों में, आप आवेदन के साथ निर्धारित
मूल्य का कोर्ट की स्टैम्प भी लगा सकते हैं।
·
पूरी
जानकारी के लिए कृपया सम्बंधित
राज्यों के नियमों का अवलोकन करें।
सूचना प्राप्त
करने की समय सीमा
जन सूचना
अधिकारी के पास आवेदन जमा करने से हर हाल में 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी
चाहिए। यदि आवेदन सहायक लोक सूचना अधिकारी के पास डाला गया है तो यह सीमा 35
दिनों की है। यदि सूचना किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतन्त्राता को
प्रभावित कर सकती है तो सूचना 48 घंटों में उपलबध् करायी
जाती है। द्वितीय अनुसुची में शामिल संगठनो के लिए यह सूचना 45 दिनों में, तथा तृतीय पक्ष में 40 दिनों उपलब्ध् कराने का प्रावधन है।


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